चीन का Artificial Sun (कृत्रिम सूर्य) EAST




हाल ही में चीन द्वारा हेफेई स्थित विज्ञान अकादमी के प्लाज्मा भौतिकी संस्थान में अपने कृत्रिम सूर्य EAST (Experimental Advanced Superconducting Tokamak) में नाभिकीय संलयन विधि द्वारा उर्जा उत्पन्न की गई जिसमें हाइड्रोजन के समस्थानिक ड्यूटीरियम (Deuterium) का प्रयोग किया गया। माना जाता है कि Deuterium द्वारा नाभिकीय संलयन विधि में 1 लीटर समुद्र के जल से उतनी ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है जितना कि 300 लीटर गैसोलीन से।


EAST चीन का परमाणु संलयन प्रायोगिक अनुसंधान उपकरण है जो गर्म प्लाज्मा को फ्यूज करने के लिए एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करता है. यह लगभग अनंत स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए सूर्य और सितारों में स्वाभाविक रूप से होने वाली परमाणु संलयन प्रक्रिया को दोहराने के लिए डिजाइन है इस रिएक्टर में अत्याधुनिक तकनीकों जैसे Vacuum system, Laser scattering system, RF waves और Microwave system का प्रयोग किया गया है।



प्रयोग के दौरान EAST ने 101 सेकंड के लिए 12 करोड़ डिग्री सेल्सियस तथा 20 सेकंड के लिए 16 करोड़ डिग्री सेल्सियस का उच्च तापमान हासिल कर लिया जो सूर्य के केंद्र के तापमान से लगभग 10 गुना अधिक है बताते चलें कि सूर्य के केंद्र का तापमान लगभग 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस है। साल 2018 में भी चीन ने ऐसा ही प्रयोग किया था तब उसने 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस के उच्च तापमान की ऊर्जा हासिल की थी। मौजूदा प्रयोग में चीन के लगभग 300 से अधिक वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों ने भाग लिया।


दरअसल प्रकृति में जीवाश्म इंधन जैसे कच्चा तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस आदि सीमित मात्रा में है साथ ही साथ इनके प्रयोग से कार्बन का उत्सर्जन भी होता है जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार है जबकि नाभिकीय संलयन विधि द्वारा उत्पन्न की जाने वाली उर्जा कहीं अधिक स्वच्छ होने के साथ-साथ इसमें इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की प्रकृति में कोई कमी नहीं है। चीनी वैज्ञानिकों का अगला लक्ष्य रिएक्टर में उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को स्थिर बनाए रखने पर केंद्रित है। जिससे इस ऊर्जा का प्रयोग वाणिज्यिक कार्यों जैसे बिजली बनाने आदि हेतु किया जा सके।



By - Pankaj Sharma

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