Pfizer और BioNTech बनाएंगे Delta Variant के खिलाफ वैक्सीन की तीसरी डोज





वैज्ञानिक कोरोनावायरस के डेल्टा वेरिएन्ट के खिलाफ वैक्सीन की तीसरी डोज़ विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। डेल्टा वेरिएन्ट की अत्यधिक संक्रमणता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है । ज्ञात हो कि डेल्टा वेरिएंट कई देशों में काफी घातक साबित हो चुका है, डेल्टा वैरीअंट की नई वैक्सीन के तीसरी डोज़ के लिए क्लिनिकल ट्रायल हेतु हरी झंडी मिलने का इंतजार है संभवत अगस्त व सितंबर माह के बीच इसकी शुरुआत होने की संभावना है।




डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की तीसरी डोज मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कोरोनावायरस के खिलाफ और ज्यादा मजबूत करेगी, वहीं USFDA (United States Food & Drugs Authority) तथा CDC (Center for Disease Control) का कहना है की जिन व्यक्तियों ने वैक्सीन की दोनों डोज़ ली है फिलहाल उन्हें किसी भी बूस्टर या तीसरे डोज़ की जरूरत नहीं है। जबकि EMA (European Medicine Agency) ने कहा कि तीसरे डोज़ की जरूरत के विषय में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। 





Pfizer तथा BioNTech का कहना है कि कोरोनावायरस के अभी तक के ज्ञात सभी तरह के वेरिएंट पर नियंत्रण के लिए वैक्सीन की तीसरी डोज लेना जरूरी है जैसा कि हम सभी जानते भी हैं कि कोरोनावायरस लगातार म्यूटेट (Mutate) हो रहा है और इसे देखते हुए Pfizer व BioNTech की बात सही भी प्रतीत हो रही है। 




कोरोनावायरस का डेल्टा वेरिएंट सबसे पहले ब्रिटेन में मिला था, और वहां से यह भारत तक पहुंचा। कोरोनावायरस की तीसरी लहर को देखते हुए जापान ने पहले ही आपातकाल घोषित कर रखा है। WHO के मुताबिक डेल्टा वेरिएट कोरोनावायरस के ही अल्फा वैरीअंट के मुकाबले 55% ज्यादा संक्रामक है, जबकि अब तक ज्ञात सभी वैक्सीन में Pfizer डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ सबसे ज्यादा कारगर व प्रभावी पाई गई है। सरकारों पर भी ठंड के मौसम से पूर्व अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीनेट करने का दबाव बना हुआ है वह भी तब जब डेल्टा वैरीअंट के भी अन्य वैरीअंट में म्यूटेट होने का खतरा बरकरार है। वैज्ञानिकों के एक धड़े ने यह भी माना है कि वह व्यक्ति जिन्होंने वैक्सीन की एक भी डोज़ नहीं ली है दरअसल वह कोरोनावायरस के नए वेरिएंट की फैक्ट्री के रूप में काम कर रहे हैं व वैक्सीनेट व्यक्तियों के मुकाबले ज्यादा संक्रमण फैला रहे हैं।

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