मानसिक तरंगों को शब्दों में बदलने में मिली सफलता



 


पक्षाघात यानी लकवा (Paralysis) अथवा किसी दुर्घटना के कारण अपने बोलने की क्षमता गवां चुके मरीजों के लिए एक राहत भरी खबर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका से आ रही है। यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने एक ऐसे न्यूरोप्रोस्थेटिक्स (Neuroprosthetic) डिवाइस का निर्माण किया है जो मानसिक तरंगों को शब्दों में बदलने की क्षमता रखती है।



इंजीनियर डेविड मोसेस ने बताया कि यह डिवाइस मानसिक तरंगों को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलकर स्क्रीन पर शब्दों के रूप में दिखाती है, इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रोड को सीधे इंसान के सिर से जोड़कर मानसिक तरंगों को कंप्यूटर एल्गोरिदम (Algorithm) के जरिए डिकोड (Decode) किया जाता है।





तकनीक की सटीकता और क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार अध्ययन किया गया इस अध्ययन का नाम BRAVO (Brain-Computer Interface Restoration of Arm and Voice) रखा गया था। अध्ययन 36 वर्षीय युवक जो लगभग पिछले 15 वर्षों से लकवा ग्रस्त है पर किया गया।




इस रिसर्च में प्रमुख रूप से डेविड मोसेस (David Moses), जेस्सी लिउ (Jessie Liu), सीन मैज़गर (Sean Metzger),  न्यूरोसर्जन एडवर्ड चैंग (Edward Chang), एसोसिएट प्रोफेसर करुणेश गांगुली (Karunesh Ganguly) शामिल थे।

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