क्या आप जानते हैं भारत में आलू कब कहां और कैसे आया दरअसल आलू का जन्म भारत में नहीं हुआ है। इसका जन्म दक्षिण अमेरिका की एंडीज पर्वत श्रृंखला में स्थित टिटिकाका झील के पास हुआ था। जो समुद्र से करीब 3,800 मीटर उंचाई पर स्थित है। भारत में आलू को बढ़ावा देने का श्रेय वारेन हिस्टिंग्स को जाता है जो 1772 से 1785 तक भारत के गवर्नर जनरल रहे लेकिन भारत में आलू का आगमन सन 1498 ईस्वी में पुर्तगालियों द्वारा हुआ भारत में मसालों का व्यापार करने के बदले पुर्तगाली आलू दे गए जिसे वह बटाटा कहते हैं, इसी से कहावत निकली "अंग्रेज अंग्रेजी छोड़ गए और पुर्तगाली आलू"!
Warren Hasting
अंग्रेजों ने सन् 1935 में शिमला, कुफरी हिमाचल और कुमायूं हिल्स में पोटैटो ब्रीडिंग सेंटर की शुरुआत कर दी. बाद में भारत सरकार ने 28 अगस्त 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण करके बेमलोई शिमला हिमाचल प्रदेश में इसका नाम सेन्ट्रल पोटैटो रिसर्च इंस्टिट्यूट कर दिया जहां वैज्ञानिकों ने आलू की अब तक 65 उन्नत किस्म की प्रजातियों का विकास किया है जबकि पूरे विश्व में आलू की लगभग 5000 से अधिक किस्में उपलब्ध है!
Central Potato Research Institute, Shimla
जबकि जंगली आलू की भी 200 से अधिक प्रजातियां ढूंढी जा चुकी है "भारत में आलू की कुछ प्रमुख किस्में" कुफरी गंगा, कुफरी नीलकंठ, कुफरी लीमा, कुफरी चिप्सोना 1, कुफरी चिप्सोना 2, कुफरी चिप्सोना 3, कुफरी फ्राईसोना, कुफरी ज्योति, कुफरी हिमसोना, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी लालिमा, कुफरी लवकर, कुफरी बादशाह, कुफरी स्वर्ण आदि उपलब्ध है।