यूरोपीय देश Norway विश्व का पहला देश है जहाँ पहली बार इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री डीजल तथा पेट्रोल कारों से ज्यादा रिकॉर्ड की गयी है, जो कि पर्यावरण के लिहाज से एक अच्छी खबर है! दरअसल नॉर्वे की सरकार ने 2025 तक डीजल व पेट्रोल कारों की ब्रिक्री पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय लिया है बताते चलें की नॉर्वे की सड़कों पर अन्य किसी भी देश के मुकाबले ज्यादा हाइब्रिड इंधन (CNG, PNG, LPG) कारें पहले से मौजूद हैं ऐसे में नॉर्वे सरकार द्वारा लिए गए इस क्रन्तिकारी निर्णय को ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ अहम रणनीति माना जा रहा है! ताज़ा आंकड़ों के अनुसार इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री जहाँ 54.3% दर्ज की गयी वहीँ डीजल पेट्रोल व अन्य हाइब्रिड कारों की बिक्री महज 45.7% दर्ज हुई!
वर्तमान में नॉर्वे की सड़कों पर डीजल व पेट्रोल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक कारों की मौजूदगी 42% हो गयी है यानि हर 100 में से 42 कारें इलेक्ट्रिक हैं जिसके 2022 तक 65% तक पहुँचने की उम्मीद है! यहाँ यह भी जानना दिलचस्प होगा कि नॉर्वे जीवाश्म इंधन (डीजल, पेट्रोल) के निर्यातक देशों की श्रेणी में आता है, जिससे उसे सालाना मोटा राजस्व प्राप्त होता है, इसके बावजूद नॉर्वे द्वारा ऐसी पहल काफी सराहनीय है, और ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ नॉर्वे की प्रतिबद्धता को दर्शाती है!
इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ाने के लिए टैक्स में छूट -
इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री प्रोत्साहित करने के लिए नॉर्वे की सरकार ने इलेक्ट्रिक कारों पर से विक्रय कर को हटा लिया है साथ ही इलेक्ट्रिक कारों के मालिकों को पेट्रोल व डीजल पर लगने वाले टैक्स से भी निजात मिल जाती है! इसे देखते हुए भविष्य में नॉर्वे की सरकार इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स को बढ़ा सकती है लेकिन फ़िलहाल 2025 तक तो ऐसा होता नहीं दिख रहा! लेकिन जानकारों द्वारा यह अनुमान लगाया गया है कि अगर सरकार द्वारा रोड टैक्स को बढ़ा भी दिया जाता है तो इलेक्ट्रिक कारों के डीजल व पेट्रोल कारों के मुकाबले रख-रखाव में काफी कम खर्च आता है और यह चलने में भी डीजल पेट्रोल कारों के मुकाबले सस्ती है!


