प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने पानी को सोने जैसी दिखने वाली धातु में बदला






चेक गणराज्य के प्राग की चेक अकादमी ऑफ़ साइंसेज के भौतिक रसायनविदों ने क्षारीय धातु की मदद से पानी को सोने जैसी दिखने वाली चमकीली धातु के रूप में बदलने में सफलता पाई है इस तकनीक को एल्कमी या रस-विधा कहते हैं! ताज़ा हुए शोध से ऐसा लगता है की वैज्ञानिकों ने इस पद्धति की पहेली कुछ हद तक सुलझा लिया है ऐसा वैज्ञानिको ने पानी की एटॉमिक संरचना में विघटन के माध्यम से बदलाव ला कर किया! 




कैसे दिया कारनामे को अंजाम  -

पानी इलेक्ट्रिक करंट का बेहतरीन संवाहक होता है ऐसा उसकी एटॉमिक संरचना के कारण होता है पानी के एटॉमिक संरचना को तोड़ने के लिए अत्यधिक दबाव (50 MBar) की आवश्यकता होती है यह दबाव पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाले दबाव का 50 लाख गुना है और इतना अधिक दबाव बड़े ग्रहों के केंद्र (Core) में ही मिलता है, प्रयोगशाला में इतना अधिक दबाव उतपन्न करना फ़िलहाल वैज्ञानिकों के लिए संभव नहीं है सो वैज्ञानिकों ने पानी के अणुओं के बीच विघटन की प्रक्रिया को अपनाया जिससे उनके बीच ओवेरलैपिंग (अतिव्यापन) की प्रक्रिया होकर  चालन बैंड (Conduction Band) बन गए और सोने की तरह चमकदार धातु का निर्माण हुआ!


चुनौतियाँ और पूर्ववर्ती प्रयास -

क्षारीय माध्यम से तरल पदार्थ को धातु में बदलने के प्रयास पहले भी हो चुके है दरअसल क्षारीय धातु सोडियम-पोटेसियम जैसे प्रतिक्रियाशील तत्वों का समूह होती है जिनके पानी के संपर्क में आने पर विस्फोट होने की सम्भावना होती है, इससे बचने के लिए वैज्ञानिकों ने प्रतिक्रिया को मंदक के माध्यम से धीमा किया जिससे विस्फोट न हो जिसके लिए सोडियम - पोटैसियम को तरल अवस्था में निर्वात चैम्बर में रखा गया, ऐसा करने का पहले भी प्रयास हो चुके हैं लेकिन सफलता इस बार मिली!

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